प्रभु यीशु का शीघ्र द्वितीय आगमन

प्रभु यीशु के जीवन और पुनरुत्थान के गवाह।
धर्म प्रचारक नहीं, यीशु मसीह के शिष्य।

यीशु कथा आयोजन

यीशु कथा आयोजन

यदि सभी मसीही चर्च मिलकर “यीशु कथा सम्मेलन” आयोजन करें तब शिष्य थॉमसन आपके शहर में आ सकते हैं। – संपर्क करें नए प्रवचन और भजन

मर-मर के जीवन में आया

मर-मर के जीवन में आया

“मर-मर के जीवन में आया” (असली और नकली क्रूस – कविता) सोचा था, सोने का मैंने हीरे मोती, जड़ा हो जिसमें चाहा वो ही, क्रूस था मैंने जो प्रिय हो सबकी आंखों मैं दूर दूर तक, ढूंढा मैंने देश विदेश, भी घूमा था मैं भूलभुलैय्यों, की गलियों में दुनिया की चौड़ी सड़कों में लोगों नेRead more about मर-मर के जीवन में आया[…]

‘पान वाला’ तो बस दौड़ता ही रह गया।

‘पान वाला’ तो बस दौड़ता ही रह गया।

किस्सा १९५३ का है, मेरे पिताजी ट्रैन में सफर कर रहे थे।(उनकी लिखी एक किताब में ये ज़िक्र है) भीड़ बहुत थी। एक छोटा सा स्टेशन आया, छोटा सा प्लेटफार्म था। चाय,समोसे वाले, मूंगफली, और पानवाले खिड़की से ग्राहकों को खोज रहे थे, चंद पैसे अपने परिवार के पेट पालन के लिए पाने के प्रयासRead more about ‘पान वाला’ तो बस दौड़ता ही रह गया।[…]

भूत प्रेत नहीं निकाले किसी ने (Evil Spirts)

भूत प्रेत नहीं निकाले किसी ने (Evil Spirts)

“भूत प्रेत (Evil spirits) नहीं निकाले किसी ने” पुराने नियम के समय के दौरान चाहे इब्राहिम , मूसा, शमूएल, दाऊद, दानिएल, युहना बप्तिस्मा देनेवाला या और कोई भी नबी क्यों न हो। जब प्रभु यीशु आये तो बीमारों को चंगाई देने के बाद दूसरा कार्य किया वो था भूतप्रेतों से छुटकारा। भूत प्रेत ग्रसित औरRead more about भूत प्रेत नहीं निकाले किसी ने (Evil Spirts)[…]

“प्रभु यीशु को स्वीकार करने” का क्या मतलब है

“प्रभु यीशु को स्वीकार करने” का क्या मतलब है

मुझसे सवाल किया गया है कि मेरी सभाओं में लोगों का आकर “प्रभु यीशु को स्वीकार करने” का क्या मतलब है और क्या में इसके अंजाम की गंभीरता समझता हूँ? बहुत ही सरल सा जवाब है। हाँ, लोग प्रभु यीशु को स्वीकार करते हैं। उसे जगत का मुक्तिदाता या उद्धारकर्ता स्वीकार करते है। उसकी पवित्रताRead more about “प्रभु यीशु को स्वीकार करने” का क्या मतलब है[…]

प्रभु यीशु को अपने कार्यक्रमों के उदघाटन के लिए बुलाना बंद करें।

प्रभु यीशु को अपने कार्यक्रमों के उदघाटन के लिए बुलाना बंद करें।

आज मसीही जगत के बुरे हाल हैं। मसीहियत मात्र एक सामाजिक गतिविधि बन रही है। मसीह के नाम पर प्रोजेक्ट (योजना) बनाये जाते हैं, फिर मसीह यीशु को रिबन काट कर उदघाटन के लिए बुलाया जाता है और आशीर्वाद माँगा जाता है। युहन्ना ५:३० का वचन याद आता है। यहाँ प्रभु यीशु कहते है “मैंRead more about प्रभु यीशु को अपने कार्यक्रमों के उदघाटन के लिए बुलाना बंद करें।[…]