प्रभु यीशु का शीघ्र द्वितीय आगमन

प्रभु यीशु के जीवन और पुनरुत्थान के गवाह।
धर्म प्रचारक नहीं, यीशु मसीह के शिष्य।

प्रभु यीशु को अपने कार्यक्रमों के उदघाटन के लिए बुलाना बंद करें।

प्रभु यीशु को अपने कार्यक्रमों के उदघाटन के लिए बुलाना बंद करें।

आज मसीही जगत के बुरे हाल हैं। मसीहियत मात्र एक सामाजिक गतिविधि बन रही है।

मसीह के नाम पर प्रोजेक्ट (योजना) बनाये जाते हैं, फिर मसीह यीशु को रिबन काट कर उदघाटन के लिए बुलाया जाता है और आशीर्वाद माँगा जाता है।
युहन्ना ५:३० का वचन याद आता है। यहाँ प्रभु यीशु कहते है “मैं अपने आप से कुछ नहीं कर सकता”
इसका अर्थ है, प्रभु यीशु इस संसार में जब मनुष्य रूप धारण करते हैं तो कोई भी काम या प्रोजेक्ट की योजना या शुरआत खुद नहींं करते। जब तक पिता नहीं चाहें।

प्रभु यीशु ने कोई काम इसलिए नहीं किया क्योंकि उन्हें अच्छा लगा पर इसलिए की पिता ने चाहा कि वो किया जाये।

वो आगे कहता है, “मैं अपनी इच्छा नहीं परंतु अपने भेजने वाले की इच्छा चाहता हूँ।”

आज मसीही कार्य हमारे आर्गेनाइजेशन (संगठन) या चर्च के पैसे या बजट पर आधारित होता है।
काम प्रारम्भ करने के पहले हम परमेश्वर की योजना नहीं जानना चाहते हैं। शायद हम ये देखते हैं कि इसके लिए लोग पैसा देंगे या नहीं, हमारा नाम होगा या नहीं, या ये कि इस से हमारी इमेज या छवि बढ़ेगी अथवा नहीं।

हमारे पास कोई बोझ नहीं है बस सांसारिक सफलता चाहते हैं। प्रभु यीशु के सामने जब सारा शहर उमड़ आया था और उसके नाम की चर्चा और महिमा हो रही थी तो भी वो उसके बीच में ही उठकर पिता से प्रार्थना के लिए जंगल  में चला जाता है। लूका ५:१५-१६

फिर लिखा है, उसने सारी रात पहाड़ पर प्रार्थना में बिताई। ताकि सुबह को अपने १२ चेले चुनने में पिता की अगुवाई मिले। लूका ६:१२-१३

अगर पर्मेश्वर के पुत्र को निर्णय लेने में इतनी अगुवाई और प्रार्थना की आवश्यकता है तो हमें कितनी है?

आज मसीही कार्य और योजनाओं (प्रोजेक्ट्स) के निर्णय घुटनों पर नहीं लिए जाते पर बोर्ड मीटिंग्स में और समर्थन (सपोर्ट) जुटाने के लिए देश विदेश में घूमते फिरते किये जाते हैं।

आज सवाल है?

कहीं आप प्रभु यीशु को अपने प्रोजेक्ट के उदघाटन में तो नहीं बुला रहे?

ये काम आपने प्रारम्भ किया था या प्रभु ने?

शिष्य थॉमसन

कोई घटी ना होगी मुझको, यीशु मेरे साथ है

कोई घटी ना होगी मुझको, यीशु मेरे साथ है

कोई घटी ना होगी मुझको, यीशु मेरे साथ है

हरी चराइयों में ले जाता, जो झरनों के पास है

अच्छा चरवाहा यीशु, अच्छा चरवाहा,
प्राण देने वाला, वो ही मेरा रखवाला,
अच्छा चरवाहा मेरा, अच्छा चरवाहा,
अच्छा चरवाहा यीशु, अच्छा चरवाहा,

अंधियारी हो वादी फिर भी, निर्भय होकर जाऊँ मैं
मौत के साए में आऊं जब, फिर भी ना घबराऊँ मैं
अच्छा चरवाहा यीशु, अच्छा चरवाहा…..

शब्द सुनु तेरा मैं हरदम, पीछे-पीछे आऊं मैं
काँधे पर ले लेता मुझको, थक जाऊँ जब राहों में
अच्छा चरवाहा यीशु, अच्छा चरवाहा…..

खून बहाये जान बचाये, यीशु ही उद्धार है
जीवनदाता जग का त्राता, यीशु ख्रिस्त महान है
अच्छा चरवाहा यीशु, अच्छा चरवाहा…..

महिमा भक्ति और प्रसंशा के गुण युग-युग गाएंगे
खून बहाने वाले मसीह के चरणों पे सर को नवाएंगे
अच्छा चरवाहा यीशु, अच्छा चरवाहा…..

जय #यीशु #मसीह की

कुँए पर बैठा आदमी कहीं मसीह तो नहीं

कुँए पर बैठा आदमी कहीं मसीह तो नहीं

कुँए पर बैठा आदमी कहीं मसीह तो नहीं ? – यूहन्ना ४

मूर्खता की बात तो लगती है। और वो भी एक गंवार सी औरत के मुंह से। और सच तो ये है कि आत्मिक बातें तो मूर्खता लगतीं हैं और इसीलिए तो उन्हें मानने के लिए विश्वास की आवश्यकता है।

“क्योंकि जब परमेश्वर के ज्ञान के अनुसार संसार ने ज्ञान से परमेश्वर को न जाना तो परमेश्वर को यह अच्छा लगा, कि इस प्रचार की मूर्खता के द्वारा विश्वास करने वालों को उद्धार दे।” – १ कुरुंथी १:२१

यदि तुम जानती और पहचानती तो मांगती।

परमेश्वर सत्य और आत्मा से भजने वाले भक्तों को ढूंढता है। न जानना, न पहचानना अंधकार है।
तुम सत्य को जानोगे और सत्य तुम्हे बंधन से आज़ाद करेगा।

सामरी स्त्री की गवाही क्या थी। यह कि उसने मुझे सब कुछ बता दिया।

उसका अपना जीवन झूट से भरा था। कभी किसी को सीधा जवाब शायद नहीं दिया था। कपट और बस धोखा, न ही उससे किसी ने उसके जीवन के कड़वे सच को बताया था।
सामरी स्त्री का प्रचार – आओ देखो उसे। इस से बड़ा कोई प्रचार नहीं होता जो अपना नहीं पर मसीह का प्रचार करे।

वो जो कुँए पर बैठा है कहीं मसीह तो नहीं?

सामरियों ने गांव के बाहर कुँए पर बैठे यीशु को जगत का उद्धारकर्ता मान लिया।

और आज ये आलम है कि क्रूस पर लटकते मसीह को देख कर भी हमारा विश्वास कमज़ोर है।
जब तक चमत्कार की चमक न दिखे तो कुछ न लगे।

आप का क्या ख़याल है ?

कुँए पर बैठा हुआ आदमी मसीह है?

शिष्य थॉमसन

परमेश्वर का राज्य धन और संपत्ति से नहीं बनेगा

परमेश्वर का राज्य धन और संपत्ति से नहीं बनेगा

मैं ऐसे भाई बहनों को उत्साहित करना चाहता हूँ जिन्हें न कोई जानें, न उन्हें पहचानें, न रास्ते में सलाम करें, न उन्हें अंग्रेजी आती है और न बड़े लोगों से मुलाकात है। और शायद वो निराश हो जाते हैं।

लेकिन स्वर्ग का पिता उन्हें प्रभु यीशु के द्वारा पहचानता है और उनके काम को सराहता है। बाइबिल में परमेश्वर दुनिया के कमज़ोरों और निकम्मो को बहुतायत से इस्तेनाल करता है।परमेश्वर कमज़ोरों द्वारा शक्तिशाली को हराने में आनंदित होता है।

अतीत में प्रभु ने क्या कहा और किया –

  • एक अकेले व्यक्ति और उसके परिवार का सारे संसार से सामना होता है। नूह का एक परिवार अकेले १०० साल तक बड़ी नाव बनाता है और परमेश्वर अपनी योजना पूरी करता है।
  • अब्राहम बूढ़ा हो चुका था। जब परमेश्वर ने बुलाया तो नहीं जानता था किधर जाता है पर फिर भी निकल गया। (इब्रानियों ११:८)
  • याकूब के घराने के ७० जन मिस्र पर छा गए।
  • मूसा के हाथ में लकड़ी दिया और फिरोन के सामने भेजा। मूसा हकलाता था और बात करने के लिए हारून को इस्तेमाल करता था।
  • गिदियन ने ३०० लोगों के साथ एक लाख से बड़ी सेना को हराया।
  • दाऊद के हाथ में पत्थर दिया और गोलियाथ ओर फलिस्तिनि सेना को हराया।
  • एलिय्याह नबी के सामने ४५० झूँठे नबी हार गए। कौए को एलिय्याह नबी को रोटी देने के लिए इस्तेमाल किया और अकाल के समय विधवा का थोड़ा आटा और कुप्पी भर तेल कभी खत्म नहीं हुआ।

प्रभु यीशू ने कहा – हे छोटे झुण्ड मत डर –

  • बस जहाँ २ या ३ मेरे नाम से इकट्ठे हों वहाँ मैं मौजूद होता हूँ वो आ जाता है उसे बड़े संबंधों (कन्वेन्षन) या हज़ारों की जनता की मीटिंग का इंतेज़ार नहीं होता।
  • सिर्फ १२ चेलों से प्रभु यीशु ने अपना कार्य प्रारंभ किया।
  • एक बच्चे की ५ रोटी और २ मछली से उसने हज़ारों को खिलाया।
  • यूहन्ना बपतिस्मा देने वाला जंगल में अकेला था। जिसे खाने पहिनने के लिए आम लोगों के सामान भी साधन नहीं थे।
  • यूहन्ना चेला पटमोस के टापू में बुरे हाल में दुनिया से कटा हुआ था। कालेपानी की सज़ा काट रहा था पर उसे ही यीशु द्वारा संसार और स्वर्ग के भविष्य को दिखने का जिम्मा दिया गया। यदि इंसान का बस चलता तो वो टीवी, एडवरटाइजिंग, और धन को इस्तेमाल करता।

परमेश्वर अपने आप को बच्चों पर प्रगट करता है क्योंकि वे आसानी से विश्वास कर लेते हैं। ज्ञानी इसलिए छूट जाते हैं क्योंकि वे विश्वास नहीं कर पाते लेकिन समझना चाहते हैं।

परमेश्वर ने कुचले, बंधुए, मूर्ख, नीच और चुंगी लेने वालों को चुन लिया और बाज़ारों व गलियों के टुंडे और लंगड़े कंगालों और अंधों को चुन लिया। और जो अपनी सामर्थ पर भरोसा रखते थे वे बाहर रह गए।(१ कुरुंथी १:२१)

क्या आप कमज़ोर हैं?

यदि हाँ तो अब आप प्रभु के लिए लायक हैं।

शिष्य थॉमसन

Which Jesus do you know?

Which Jesus do you know?

Does he look like the one I describe here?

“I marvel that ye are so soon removed from Him that called you into the grace of Christ unto another gospel: perverted gospel of Christ.” (Galatians 1:6-8).

Another Jesus and another Gospel….

  • Another Jesus does not talk about sin.
  • He does not talk about repentance
  • Faith is preached but turning from sin is not mentioned.
  • Another Jesus talks about the glories of this world
  • Another Jesus makes you rich and powerful, in society government and world.
  • He makes you influential.
  • He brings you respect and honour in this world
  • He answers all your prayers with one word – Money
  • He does not say blessed are the poor the foolish and weak and downtrodden. But instead calls them cursed.
  • He is not seen with Lepers, blind, captives and oppressed, but enjoys being in limelight.
  • He does not ask you to deny self
  • He does not ask you to take up the cross
  • He allows you fame and fortune
  • He lifts you up on a pedestal and not on a cross
  • Another Jesus sits on the throne
  • He is more like a magician
  • Another Jesus obeys his disciples
  • He is seen among the rich and famous.
  • Another Jesus does not wash his disciple’s feet but instead encourages disciples to give money.
  • Another Jesus needs and likes security and government machinery to be available to serve him.
  • Another Jesus also has seeds but that brings forth tares.
  • He does not weep when he sees others suffer
  • Another Jesus does not demand holiness but demands Faith.
  • He does not say –If any man follow me let him forsake all that he has..
  • Another Jesus does not emphasise that I am the way the truth and the Life, and No one can come to the Father without me.

Shishye thompson