प्रभु यीशु का शीघ्र द्वितीय आगमन

प्रभु यीशु के जीवन और पुनरुत्थान के गवाह।
धर्म प्रचारक नहीं, यीशु मसीह के शिष्य।

भेजा कहाँ, गए किस ओर, और पहुंचे किधर

भेजा कहाँ, गए किस ओर, और पहुंचे किधर

अक्सर देखा ये जाता है कि लोग बेहतर जगह जाना चाहते हैं। प्रभु की सेवा करना चाहते हैं चाहे पास्टर हों या आम विश्वासी। गवाह तो सभी को बनना है।

प्रभु यीशु ने कहा था जाओ – तो कहाँ जा रहे हैं?

  • तरशीष को जाएंगे या नीनवे के पापियों की मुक्ति के लिए?
  • हमारा प्रभु की सेवा का निर्णय किस आधार पर होता है?

बाइबिल स्कूल में पढ़ने के बाद साइकिल चलाना अच्छा नहीं लगता है। रास्ते में खड़े होकर सुसमाचार देने में शर्म है और डर है। गरीबों की बस्ती में रहेंगे तो हमारा स्तर (स्टैण्डर्ड) गिर जाएगा।

मुझे सीखने का मौका मिला जब में एक ऐसे शहर गया जिसकी प्रतिष्ठा (रेप्यूटेशन) ख़राब थी। हिंसा डकैती और अपराध था। वहां में एक ऐसे पास्टर के घर पहुंचा जो अपनी पत्नी और छोटे बच्चों के साथ सबसे खतरनाक इलाके को चुनकर प्रभु की सेवा के लिए आया। मैंने उसके घर में बहुत से पड़ोसियों को खाना खाते हुए देखा। ये वो लोग थे जिन्हें किसी ने पहले कभी दावत नहीं दी थी।

कई लोग उनमें से आज प्रभु के अनुयायी बन गए हैं।

इसी तरह मैं एक धनी परिवार में गया। उनका जवान बेटा घर छोड़कर एक गरीबों की बस्ती में एक कमरा लेकर रह रहा था। वहां पर भी कुछ पीड़ित लोग अब मसीह में हैं।

प्रभु यीशु शून्य बने और हमारे बीच आये। उन्हों ने अपने आप को इतना दीन कर दिया की अंधों, कोड़ियों, बीमारों, वेश्याओं और चुंगी लेनेवालों के बीच बैठ सके और उन्हें परमेश्वर के राज्य में ला सके। प्रभु यीशु राजा बनकर महल में नहीं बैठे और न ही कोई गुरु बनके अपने आश्रम के स्वर्ण सिहांसन पर बैठकर भक्तों से पाँव धुलवाते रहे। फिलिपिओं २:५-११

नीचे लिखे पवित्र शास्त्र के वचन हमें प्रेरित करें।

लूका ४:१८ – प्रभु का आत्मा मुझ पर है, इसलिये कि उस ने कंगालों को सुसमाचार सुनाने के लिये मेरा अभिषेक किया है, और मुझे इसलिये भेजा है, कि बन्धुओं को छुटकारे का और अन्धों को दृष्टि पाने का सुसमाचार प्रचार करूं और कुचले हुओं को छुड़ाऊं।

प्रभु यीशु की महफ़िल में कंगाल, कुचले, अंधे और बंधुए बैठते हैं।

मत्ती ४:१५-१६ – जबूलून और नपताली के देश, झील के मार्ग से यरदन के पार अन्यजातियों का गलील। जो लोग अन्धकार में बैठे थे उन्होंने बड़ी ज्योति देखी; और जो मृत्यु के देश और छाया में बैठे थे, उन पर ज्योतिचमकी।

यूहन्ना १:५ – और ज्योति अन्धकार में चमकती है; और अन्धकार ने उसे ग्रहण न किया। १० वह जगत में था, और जगत उसके द्वारा उत्पन्न हुआ, और जगत ने उसे नहीं पहिचाना। ११ वह अपने घर आया और उसके अपनों ने उसे ग्रहण नहीं किया।

अंधकार ने सृष्टि ने और उसके घरवालों ने उसे स्वीकार नहीं किया। लेकिन फिर भी वो आया। और हमें भी अपनी ही तरह भेजा – यीशु ने उन से कहा, जैसे पिता ने मुझे भेजा है, वैसे ही मैं भी तुम्हें भेजता हूं। यूहन्ना २०:२१

और कहाँ भेजा? भेड़ियों के बीच में

मत्ती १०:१६ – देखो, मैं तुम्हें भेड़ों की नाईं भेडिय़ों के बीच में भेजता हूं।

आज प्रभु यीशु के विश्वासी या कार्यकर्त्ता या स्वयं-सेवक गवाह ऐसी जगह चुनते हैं जहाँ अच्छा स्कूल है, अस्पताल है, साफ सफाई है, बड़ा मॉल है।

प्रभु यीशु ने कहा, मैं सेवा करवाने नहीं सेवा करने आया हूँ। में खोए हुओं को ढूंढने और बचाने आया हूँ।

आज सवाल है

जाओ तो प्रभु यीशु का आदेश था
पर हम गए किधर पुहंचे किधर?

शिष्य थॉमसन

 

 

चाहे हो कोई सरकार, प्रभु यीशु का है अधिकार

चाहे हो कोई सरकार, प्रभु यीशु का है अधिकार

चाहे हो कोई सरकार
प्रभु यीशु का है अधिकार

(प्रभु यीशु के अनुयायियों का नारा)

नेबुकदनेज़र राजा सोच बैठा था कि शायद राज्य उसका है और वो शासन कर रहा है। जब वह बाबुल के राजभवन की छत पर टहल रहा था, तब वह कहने लगा, क्या यह महान बाबुल नहीं है, जिसे मैं ही ने अपने बल और सामर्थ से राजनिवास होने को और अपने प्रताप की बड़ाई के लिये बसाया है। उसी समय उसका शासन उसके हाथ से निकल गया और वो कंगाल बन गया, और उसका दिमाग और प्रकृति भी बदल गई यहां तक की वो घास खाने लगा और जानवर की तरह हो गया। ये एक ऐसे व्यक्ति की तस्वीर है जो परमेश्वर के अधिकार को चुनौती देता है और बगावत करता है।

आज भी हमारे संसार में ऐसे लोग हैं जो अपने बल और वैभव को कुछ समझते हैं। उनके घास खाने के दिन नज़दीक हैं।

जब नेबुकदनेज़र को सात साल घास खाने के बाद होश आया तो उसने स्वीकार किया और ऐलान किया कि जो जीवित हैं वे जान लें कि परमप्रधान परमेश्वर मनुष्यों के राज्य में प्रभुता करता है, और उसको जिसे चाहे उसे दे देता है, और वह छोटे से छोटे मनुष्य को भी उस पर नियुक्त कर देता है।वह छोटे इंसान को भी तख़्त पर बैठा देता है।

बाइबिल में एक दुनिया का सब से बड़ा रिकॉर्ड है तख़्त पाने का। युसूफ मिस्र देश के तहखाने में सुबह तक कैद था और शाम को मिस्र का प्रधानमंत्री बन जाता है।

मेरा एक पसंदीदा बाइबिल वचन है।
भजन ११३:७ वह कंगाल को मिट्टी पर से, और दरिद्र (निर्धन) को घूरे पर से उठा कर ऊंचा करता है।

फिली २:५-११ जैसा मसीह यीशु का स्वभाव था ••• जिसने अपने आप को ऐसा शून्य कर दिया, और दास बना••• अपने आप को दीन किया••••हां, क्रूस की मृत्यु भी सह ली। इस कारण परमेश्वर ने उस को अति महान भी किया कि जो स्वर्ग में और पृथ्वी पर और जो पृथ्वी के नीचे हैं वे सब यीशु के नाम पर घुटना टेकें।

उसने हमें अपनी संतान होने का अधिकार दिया है – यूहन्ना १:१२

प्रभु यीशु ने कहा, सारा अधिकार मुझे दिया गया है इसलिए जाओ।

क्या अभी भी डर है?

शिष्य थॉमसन

परमेश्वर हँसेगा

परमेश्वर हँसेगा

फ्रांस के प्रसिद्ध दार्शनिक और नास्तिक वोल्टेर ने [१६९४ – १७७८] में कहा था कि अगले १०० वर्षों में बाइबल का अस्तित्व ख़त्म हो जाएगा और कोई उसको नहीं पूछेगा।

लेकिन उसके मरने के ५० वर्ष के बाद जिनीवा बाइबल सोसायटी ने वोल्टेर का घर खरीदा और उसी के प्रिंटिंग प्रेस से हज़ारों बाइबल प्रिंट करना चालू कर दिया।

बाइबल का एक वचन मुझे याद आता है: “वह जो स्वर्ग में विराजमान है, हँसेगा, प्रभु उनको ठट्ठों में उड़ाएगा” भजन संहिता २:४

जी हाँ इंसान की हर बग़ावत पर परमेश्वर को हँसी आती है।

एक और किस्सा है:

रोमी साम्राज्य का निरंकुश महाराजा डाइयूक्लेशियन ने सन् ३०३ में सारे वचन [बाइबल] की प्रतियाँ जब्त करने का आदेश दिया था, लोगों के पास पूरी बाइबल तो नही रही होगी कुछ प्रष्ट या भाग मिला होगा। जिनके पास बाइबल के अंश मिले उन्हें भी यातनाएँ देकर मार डाला गया। हर जगह वचन को जलाया गया और इसके बाद उसने बाइबल की राख पर एक विजय का स्तंभ (पिलर) खड़ा किया, जिस पर लिखा था – मसीहियत का अस्तित्व मिटा दिया गया है।

परंतु इसके २० वर्षों के बाद ही कॉन्स्टेंटीन राजा ने रोम का धर्म ही मसीहियत घोषित कर दिया और वचन फिर तैयार होने लगा और फैलने लगा।

उस समय के प्रभु यीशू के अनुयायियों ने कुछ बाइबल के अंशों के कारण अपनी जान गँवा दी थी और आज हमारे पास पूरी बाइबल होने पर भी हम उसकी कीमत नहीं समझते हैं। बाइबिल के अलग अलग वर्षन हैं, रंगीन पिक्चर बाइबल हैं, हर उम्र के लिए हैं परंतु जान देने की बात दूर है उसे पड़ना भी नहीं चाहते।

परमेश्वर का वचन जीवित है, सत्य है और आत्मा है।

‘मनुष्य केवल रोटी ही से नहीं, परन्‍तु हर एक वचन से जो परमेश्वर के मुख से निकलता है जीवित रहेगा’।

मत्ती ४:१२

‘आकाश और पृथ्वी टल जाएंगे, परंतु मेरी बातें कभी न टलेंगी’। मत्ती २४:३५

‘क्‍योंकि परमेश्वर का वचन जीवित, और प्रबल, और हर एक दोधारी तलवार से भी बहुत चोखा है, और जीव, और आत्मा को, और गांठ-गांठ, और गूदे-गूदे को अलग करके, आर-पार छेदता है; और मन की भावनाओं और विचारोंको जांचता है’।

[इस वचन का अर्थ है – कोई बाइबल पढ़ने के बाद ये नही कह सकता है कि मुझे पाप ओर पवित्रता के बीच का अंतर नहीं मालूम पड़ रहा है]

आपका क्या ख़याल है? क्या परमेश्वर का वचन कीमती है?

शिष्य थॉमसन

मैं इस पत्थर पर अपनी कलीसिया बनाऊंगा

मैं इस पत्थर पर अपनी कलीसिया बनाऊंगा

मैं इस पत्थर पर अपनी कलीसिया बनाऊंगा और अधोलोक के फाटक उस पर प्रबल न होंगे।

मत्ती: १६:१६-१८

१६. शमौन पतरस ने उत्तर दिया, “कि तू जीवते परमेश्वर का पुत्र मसीह है”
१७. यीशु ने उस को उत्तर दिया, कि हे शमौन, योना के पुत्र, तू धन्य है; क्‍योंकि मांस और लहू ने नहीं, परन्‍तु मेरे पिता ने जो स्‍वर्ग में है, यह बात तुझ पर प्रगट की है।
18. और मैं भी तुझ से कहता हूं, कि तू पतरस है; और मैं इस पत्थर पर अपनी कलीसिया बनाऊंगा: और अधोलोक के फाटक उस पर प्रबल न होंगे।

इस भाग में हम क्या सीखते हैं?

यही कि कलीसिया या चर्च का निर्माण प्रभु यीशु ही करते हैं. चर्च प्लांटिंग (स्थापना) हमारी ताक़त, प्रतिभा, योग्यता या रुपए (डॉलर) की शक्ति द्वारा नहीं होता है। यह काम केवल प्रभु यीशु का है। कहाँ और कैसे निर्माण होगा यह उसकी आत्मा द्वारा निर्देशित होता है।

और यह कि कलीसिया का निर्माण और शैतान का हमला साथ साथ चलता है – क्योंकि प्रभु यहाँ कहते हैं कि अधोलोक के फाटक उस पर प्रबल न होंगे।

यदि हमारी कलीसिया आत्मिक युद्ध नहीं महसूस कर रही है तो शायद हम कलीसिया निर्माण स्वयं कर रहे हैं प्रभु यीशु नहीं। आज मसीही जगत मे चर्च प्लांटिंग (कलीसिया स्थापना) एक मल्टिनॅशनल बिज़्नेस (बहुराष्ट्रीय व्यापार) की तरह चल रहा है – बजट पर आधारित है।

किस पत्थर पर कलीसिया का निर्माण होगा?

जीवते परमेश्वर का पुत्र मसीह [पत्थर] इस वचन पर प्रभु यीशु को परमेश्वर का पुत्र का खिताब देने के खिलाफ शैतान है – मत्ती ४ में वो बारबार कहता है – यदि तू परमेश्वर का पुत्र है तो ?? आज ऐसे धर्म हैं जो कहते हैं प्रभु यीशु परमेश्वर के पुत्र नही हो सकते।

यहुदिओं ने यीशु को मारने के लिए पत्थर उठाए, युहन्ना ५ में उनका आरोप था कि उसने अपने आप को परमेश्वर का पुत्र कहकर परमेश्वर की निंदा की है।

पतरस को प्रभु यीशु का जवाब –

मांस और लहू ने नहीं, परन्तु मेरे पिता ने जो स्वर्ग में है, यह बात तुझ पर प्रगट की है। – कहने का अर्थ – ज्ञान से नहीं – यीशू के साथ घूमने फिरने से नहीं – साथ में तो यहूदा भी रहता था।

ये परमेश्वर का प्रगट करना हैं

मत्ती ११:२५ में यीशु ने कहा, हे पिता, स्वर्ग और पृय्वी के प्रभु; मैं तेरा धन्यवाद करता हूं, कि तू ने इन बातों को ज्ञानियों और समझदारोंसे छिपा रखा, और बालकों पर प्रगट किया है।

कुरुन्थिओ १:२६-२८ में जैसे लिखा है, “हे भाइयो, अपके बुलाए जाने को तो सोचो, कि न शरीर के अनुसार बहुत ज्ञानवान, और न बहुत सामर्यी, और न बहुत कुलीन बुलाए गए। परन्तु परमेश्वर ने जगत के मूर्खों को चुन लिया है, कि ज्ञानवालों को लज्ज़ित करे; और परमेश्वर ने जगत के निर्बलों को चुन लिया है, कि बलवानों को लज्ज़ित करे। और परमेश्वर ने जगत के नीचोंऔर तुच्छों को, बरन जो हैं भी नहीं उन को भी चुन लिया, कि उन्हें जो हैं, व्यर्थ ठहराए।”

युहन्ना ४ में सामरी स्त्री – ५ पति कर चुकी थी, ६ वें के साथ बिन ब्याहे रहती थी, अनपड़, गँवार ही थी – फिर भी जीवन का जल [पवित्र आत्मा] पाकर वो सारे गाँव वालों को आत्मिक कलीसिया मे लाती है – क्योंकि वह नहीं बोल रही थी – पर उसके अंदर से पवित्र आत्मा कार्य कर रहा था। परमेश्वर का प्रगट करना था। सारा निनवे बदल गया इसलिए नहीं की उन्हें मछली का चमत्कार पसंद आया, पर इसलिए की पवित्र आत्मा ने उन्हें पाप से कायल किया।

कहीं हम तो नही बना रहे कलीसिया – प्रभु यीशु को बनाने दें।

शिष्य थॉमसन

प्रेमपूर्ण आग्रह – प्रभु यीशु का

प्रेमपूर्ण आग्रह – प्रभु यीशु का

मेरे तोड़े गये शरीर ओर बहाए लहू को याद करना। प्रभु यीशु आख़िरी रात को अपने चेलों के साथ भोजन करने बैठते हैं और उस भोज के दौरान वो एक नया प्रेमपूर्ण आग्रह करते हैं या जिसे हम प्रेम नियम भी कह सकते हैं।

वो रोटी हाथ में लेकर कहते हैं, यह मेरी देह है, जो तुम्हारे लिये है: मेरे स्मरण के लिये यही किया करो।

मेरे तोड़े गये बदन को याद रखना, उन्होंने कटोरा भी लिया, और कहा; यह कटोरा मेरे लहू में नई वाचा है; जब कभी पीओ, तो मेरे स्मरण के लिये यही किया करो।

यह नया अनुबंध (कांट्रॅक्ट) है।

भेड़, बकरियों, बैलों के लहू के समान नहीं जो कोई स्थाई उपाय ना दे सके, सालाना की माफी से क्या फ़ायदा है। यदि हमारा गुनाहों से मन ना फिराना हुआ, यदि हमारे विवेक में कुछ तब्दीली नहीं आई यदि हमारा चरित्र ही नहीं बदला?

प्रभु यीशु की नयी वाचा का लहू हमें स्थाई क्षमा देता है, हमारे मरी आत्मा को जीवित करता है, हमारे विवेक को नया करके प्रभु यीशू का मन स्थापित करता है।

उसका लहू हमारे लिए प्रेम दया, क्षमा और अनुग्रह की बातें करता है। यानि जान देकर वो वादा करता है। यह वो लहू नहीं जो हाबिल का कैन द्वारा बहाया गया था – जो अभी भी जीवित तो है पर मिट्टी से पुकार कर बदले की अपील करता है।

प्रभु यीशु ने कहा – मेरे बहे लहू को स्मरण करते हुए मुझे याद करना। जब कभी तुम यह रोटी खाते, और इस कटोरे में से पीते हो, तो प्रभु की मृत्यु को जब तक वह न आए, प्रचार करते हो।

दुनिया में कोई नहीं जो अपने ज़ख़्मी शरीर, बहते खून या अपनी मौत की याद अपने चाहने वालों के लिए छोड़ता हो। तो फिर प्रभु यीशू ने ऐसा क्यों किया ?

मेरे लिए तुम सोने चाँदी या कीमती स्मारक नहीं बनाना या मेरी मूर्तियाँ स्थापित नहीं करना लेकिन मेरी मौत को याद करना और दुनिया पर प्रगट करना दुनिया की नज़र में ये उसकी हार ही क्यूँ नं नज़र आए लेकिन उसकी मृत्यु ही हमारा वरदान बनी है, हमारा जीवन बनी है।

उसके शरीर में भाग लेने का मतलब है उसका जीवन और हमारा जीवन अब एक सा है। उसकी मौत को याद कर मातम नहीं करना है। वो हमारी सहानुभूति नहीं चाह रहा है। यदि ऐसा होता तो एक कलाकार की बनाई गयी भावुक तस्वीर ही काफ़ी होती।

उसकी मृत्यु का प्रचार करना है – और यदि उसकी मृत्यु का प्रचार करते हैं तो उसमें हमारी अपनी मौत भी छिपी हुई है क्योंकि हम भी उसके साथ क्रूस पर मार गये हैं।

हमारा पुराना मनुष्यत्व उसके साथ क्रूस पर चढ़ाया गया, ताकि पाप का शरीर व्यर्थ हो जाए, ताकि हम आगे को पाप के दासत्व में न रहें। रोमी ६:६

  • इसलिए यदि हम नहीं मरे तो हमारा मसीही जीवन एक धोखा है।
  • यदि हम उसके साथ मर गये तो उसके साथ हमेशा के लिए जियेंगे भी।
  • यदि हम उसके साथ मर गये और प्रभु से प्रेम करते हैं तो हम उसका प्रेम आग्रह हमेशा पूर्ण करेंगे

शिष्य थॉमसन