उम्मीद रखिए

क्योंकि मनुष्य का पुत्र खोए हुओं को ढूंड ने और उनका उद्धार करने आया है। लूका  19:10

मनुष्य का पुत्र प्रभु यीशू है जो हमारे समान बन गया हमारे  गाँव आया और हमारे घर चला आया।

खोया हुआ इंसान, खुद भी खोया  है और सब कुछ  जो उसका है वो भी खो गया है।

किसी ने एक कहानी बताई थी एक जवान लड़की गाँव में अपनी माँ के साथ रहती थी। ग़रीबी और भूख  से परेशान  एकदिन वो माँ को बिना बताये घर छोड़ शहर को निकल जाती  है। ना उसके पास पैसा था ना ही पढ़ाई। शहर के ख़तरे उसे मालूम नही थे।

माँ ने जब देखा की बेटी घर में नही है  तो वो बस में बैठ  शहर गयी अपनी खुद की तस्वीर की प्रतियाँ  उसने कई जगहचिपका दी जिसे उसकी बेटी देख सके। बहुत समय के बाद जब वह लुट चुकी थी और  बंधन में  थी तब उसकी नज़र एक दिन उसकी माँ की तस्वीर पर पड़ी,  पीछे लिखा था – “तुमने चाहे जो कुछ भी किया हो चाहे तुम कहीं भी गयीं हो वापस लौट आओ।”

इस तस्वीर से शायद हम अंजान नहीं।

खुशख़बरी है 

वो उनके पास आया  है जिनका सब लुट चुका  है, वो अंधकार के साए में ओर मौत की वादी में हैं और  तब एक आवाज़आती  है मैं  आ गया हूँ – कंगालों को खुशख़बरी लेकर अंधों को दृष्टि दान लेकर बंधुओं को छुटकारा और  कुचले हुओं की मुक्ति लेकर।

उम्मीद रखिए

शिष्य थॉमसन