मैं इस पत्थर पर अपनी कलीसिया बनाऊंगा

मैं इस पत्थर पर अपनी कलीसिया बनाऊंगा और अधोलोक के फाटक उस पर प्रबल न होंगे।

मत्ती: १६:१६-१८

१६. शमौन पतरस ने उत्तर दिया, “कि तू जीवते परमेश्वर का पुत्र मसीह है”
१७. यीशु ने उस को उत्तर दिया, कि हे शमौन, योना के पुत्र, तू धन्य है; क्‍योंकि मांस और लहू ने नहीं, परन्‍तु मेरे पिता ने जो स्‍वर्ग में है, यह बात तुझ पर प्रगट की है।
18. और मैं भी तुझ से कहता हूं, कि तू पतरस है; और मैं इस पत्थर पर अपनी कलीसिया बनाऊंगा: और अधोलोक के फाटक उस पर प्रबल न होंगे।

इस भाग में हम क्या सीखते हैं?

यही कि कलीसिया या चर्च का निर्माण प्रभु यीशु ही करते हैं. चर्च प्लांटिंग (स्थापना) हमारी ताक़त, प्रतिभा, योग्यता या रुपए (डॉलर) की शक्ति द्वारा नहीं होता है। यह काम केवल प्रभु यीशु का है। कहाँ और कैसे निर्माण होगा यह उसकी आत्मा द्वारा निर्देशित होता है।

और यह कि कलीसिया का निर्माण और शैतान का हमला साथ साथ चलता है – क्योंकि प्रभु यहाँ कहते हैं कि अधोलोक के फाटक उस पर प्रबल न होंगे।

यदि हमारी कलीसिया आत्मिक युद्ध नहीं महसूस कर रही है तो शायद हम कलीसिया निर्माण स्वयं कर रहे हैं प्रभु यीशु नहीं। आज मसीही जगत मे चर्च प्लांटिंग (कलीसिया स्थापना) एक मल्टिनॅशनल बिज़्नेस (बहुराष्ट्रीय व्यापार) की तरह चल रहा है – बजट पर आधारित है।

किस पत्थर पर कलीसिया का निर्माण होगा?

जीवते परमेश्वर का पुत्र मसीह [पत्थर] इस वचन पर प्रभु यीशु को परमेश्वर का पुत्र का खिताब देने के खिलाफ शैतान है – मत्ती ४ में वो बारबार कहता है – यदि तू परमेश्वर का पुत्र है तो ?? आज ऐसे धर्म हैं जो कहते हैं प्रभु यीशु परमेश्वर के पुत्र नही हो सकते।

यहुदिओं ने यीशु को मारने के लिए पत्थर उठाए, युहन्ना ५ में उनका आरोप था कि उसने अपने आप को परमेश्वर का पुत्र कहकर परमेश्वर की निंदा की है।

पतरस को प्रभु यीशु का जवाब –

मांस और लहू ने नहीं, परन्तु मेरे पिता ने जो स्वर्ग में है, यह बात तुझ पर प्रगट की है। – कहने का अर्थ – ज्ञान से नहीं – यीशू के साथ घूमने फिरने से नहीं – साथ में तो यहूदा भी रहता था।

ये परमेश्वर का प्रगट करना हैं

मत्ती ११:२५ में यीशु ने कहा, हे पिता, स्वर्ग और पृय्वी के प्रभु; मैं तेरा धन्यवाद करता हूं, कि तू ने इन बातों को ज्ञानियों और समझदारोंसे छिपा रखा, और बालकों पर प्रगट किया है।

कुरुन्थिओ १:२६-२८ में जैसे लिखा है, “हे भाइयो, अपके बुलाए जाने को तो सोचो, कि न शरीर के अनुसार बहुत ज्ञानवान, और न बहुत सामर्यी, और न बहुत कुलीन बुलाए गए। परन्तु परमेश्वर ने जगत के मूर्खों को चुन लिया है, कि ज्ञानवालों को लज्ज़ित करे; और परमेश्वर ने जगत के निर्बलों को चुन लिया है, कि बलवानों को लज्ज़ित करे। और परमेश्वर ने जगत के नीचोंऔर तुच्छों को, बरन जो हैं भी नहीं उन को भी चुन लिया, कि उन्हें जो हैं, व्यर्थ ठहराए।”

युहन्ना ४ में सामरी स्त्री – ५ पति कर चुकी थी, ६ वें के साथ बिन ब्याहे रहती थी, अनपड़, गँवार ही थी – फिर भी जीवन का जल [पवित्र आत्मा] पाकर वो सारे गाँव वालों को आत्मिक कलीसिया मे लाती है – क्योंकि वह नहीं बोल रही थी – पर उसके अंदर से पवित्र आत्मा कार्य कर रहा था। परमेश्वर का प्रगट करना था। सारा निनवे बदल गया इसलिए नहीं की उन्हें मछली का चमत्कार पसंद आया, पर इसलिए की पवित्र आत्मा ने उन्हें पाप से कायल किया।

कहीं हम तो नही बना रहे कलीसिया – प्रभु यीशु को बनाने दें।

शिष्य थॉमसन

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