प्रभु यीशु का शीघ्र द्वितीय आगमन

प्रभु यीशु के जीवन और पुनरुत्थान के गवाह।
धर्म प्रचारक नहीं, यीशु मसीह के शिष्य।

‘पान वाला’ तो बस दौड़ता ही रह गया।

‘पान वाला’ तो बस दौड़ता ही रह गया।

किस्सा १९५३ का है, मेरे पिताजी ट्रैन में सफर कर रहे थे।(उनकी लिखी एक किताब में ये ज़िक्र है) भीड़ बहुत थी। एक छोटा सा स्टेशन आया, छोटा सा प्लेटफार्म था। चाय,समोसे वाले, मूंगफली, और पानवाले खिड़की से ग्राहकों को खोज रहे थे, चंद पैसे अपने परिवार के पेट पालन के लिए पाने के प्रयासRead more about ‘पान वाला’ तो बस दौड़ता ही रह गया।[…]

भूत प्रेत नहीं निकाले किसी ने (Evil Spirts)

भूत प्रेत नहीं निकाले किसी ने (Evil Spirts)

“भूत प्रेत (Evil spirits) नहीं निकाले किसी ने” पुराने नियम के समय के दौरान चाहे इब्राहिम , मूसा, शमूएल, दाऊद, दानिएल, युहना बप्तिस्मा देनेवाला या और कोई भी नबी क्यों न हो। जब प्रभु यीशु आये तो बीमारों को चंगाई देने के बाद दूसरा कार्य किया वो था भूतप्रेतों से छुटकारा। भूत प्रेत ग्रसित औरRead more about भूत प्रेत नहीं निकाले किसी ने (Evil Spirts)[…]

“प्रभु यीशु को स्वीकार करने” का क्या मतलब है

“प्रभु यीशु को स्वीकार करने” का क्या मतलब है

मुझसे सवाल किया गया है कि मेरी सभाओं में लोगों का आकर “प्रभु यीशु को स्वीकार करने” का क्या मतलब है और क्या में इसके अंजाम की गंभीरता समझता हूँ? बहुत ही सरल सा जवाब है। हाँ, लोग प्रभु यीशु को स्वीकार करते हैं। उसे जगत का मुक्तिदाता या उद्धारकर्ता स्वीकार करते है। उसकी पवित्रताRead more about “प्रभु यीशु को स्वीकार करने” का क्या मतलब है[…]

प्रभु यीशु को अपने कार्यक्रमों के उदघाटन के लिए बुलाना बंद करें।

प्रभु यीशु को अपने कार्यक्रमों के उदघाटन के लिए बुलाना बंद करें।

आज मसीही जगत के बुरे हाल हैं। मसीहियत मात्र एक सामाजिक गतिविधि बन रही है। मसीह के नाम पर प्रोजेक्ट (योजना) बनाये जाते हैं, फिर मसीह यीशु को रिबन काट कर उदघाटन के लिए बुलाया जाता है और आशीर्वाद माँगा जाता है। युहन्ना ५:३० का वचन याद आता है। यहाँ प्रभु यीशु कहते है “मैंRead more about प्रभु यीशु को अपने कार्यक्रमों के उदघाटन के लिए बुलाना बंद करें।[…]

कुँए पर बैठा आदमी कहीं मसीह तो नहीं

कुँए पर बैठा आदमी कहीं मसीह तो नहीं

कुँए पर बैठा आदमी कहीं मसीह तो नहीं ? – यूहन्ना ४ मूर्खता की बात तो लगती है। और वो भी एक गंवार सी औरत के मुंह से। और सच तो ये है कि आत्मिक बातें तो मूर्खता लगतीं हैं और इसीलिए तो उन्हें मानने के लिए विश्वास की आवश्यकता है। “क्योंकि जब परमेश्वर केRead more about कुँए पर बैठा आदमी कहीं मसीह तो नहीं[…]