तीन सूत्रीय यीशु जीवन

आज हम मसीही कहलाते हैं

पर सवाल हैं

क्या हमने प्रभु यीशु का जीवन पाया है? – यूहन्ना १०:१०

शायद

  • ज्ञान है पर जीवन नही है
  • क्रिया-कर्म हैं पर आज्ञापालन नही है
  • विश्वास है पर अनुभव नहीं हैं
  • शिक्षाएं हैं पर प्रेम नहीं है
  • सत्य है पर अनुग्रह नहीं है
  • धर्म है पर मुक्ति नहीं है

ऐसा क्यों?

इसलिए कि हमने प्रभु यीशु की बुलाहट को सही तरह से नहीं सुना है।

उसने कहा है

यदि कोई मेरे पीछे आना चाहे तो अपने आप से इन्कार करे और प्रतिदिन अपना क्रूस उठाए हुए मेरेपीछे हो ले – लूका :२३

तीन सूत्र का जीवन है और इसी क्रम में इसे अपनाना होगा

सूत्र .  स्वेच्छा का इन्कार करना होगा
सूत्र . हमें अपना स्वयं का क्रूस उठाना होगा
सूत्र . परमेश्वर की इच्छा जानकर हर दिन उस पर चलना होगा

. अपने आप से इनकार करे [स्वेच्छा/ स्वार्थ]
हमें “मैं” या “अहं” केंद्रित जीवन त्यागना होगा I संसार, शैतान और शरीर की इच्छा को त्यागना है,अपने अधिकारों के लिए नही लड़ना है। संसार के उस आनंद को छोड़ना है जो हमे परमेश्वर से दूर लेजाता है। शरीर की लालसा, आँखों की अभिलाषा और जीविका का घमंड [धन संपत्ति और वैभव परभरोसा] छोड़ना है –  यूहन्ना :१६ रोमियो :११

. अपना क्रूस प्रतिदिन उठाए
दुख उठाने को तैयार रहे। पवित्र जीवन जीने की राह में दुख, क्लेश, नुकसान, हिंसा और जान तकखोने को तैयार रहे।

कौन हम को मसीह के प्रेम से अलग करेगा? क्या क्लेश, या संकट, या उपद्रव, या अकाल, या नँगाई,या जोखिम, या तलवार ? रोमियों :३५

. मेरे पीछे चला आए
परमेश्वर की इच्छा हर समय जानकार उस पर अमल करना है।

प्रभु यीशु ने कहा – मनुष्य केवल रोटी ही से नहीं पर हर एक वचन से जो परमेश्वर के मुँह से निकलताहै जीवित रहेगा। मत्ती ४:४

परमेश्वर का वचन देह्धारि होकर हमारे बीच रहा लेकिन आज प्रभु यीशु शरीर में हमारे बीच नहीं हैंपर उनके वचन हमारे साथ हैं। प्रभु यीशु में जीवन था ओर वो जीवन मनुष्य का मार्गदर्शन या ज्योतिथा –यूहन्ना :

प्रभु यीशू ने स्वयं इन तीनों सूत्रों पर अमल किया

.   प्रभु  यीशु ने परमेश्वर के तुल्य होकर भी मनुष्य रूप धारण कर हमारे बीच डेरा किया।  वह सेवकबनकर आया, वह कंगाल बनकर आया, और शून्य बन गया।  फ़िलि. :७ यूहन्ना १:१४

.  प्रभु यीशु ने क्रूस उठाया और हमें मुक्ति देने के लिए मृत्युदंड स्वीकार किया। यूहन्ना १९:१७१८

.  प्रभु यीशु ने कहा “मैं अपनी इच्छा नहीं परन्तु  मेरे भेजने वाले की इच्छा पूरी करने के लिए स्वर्गसे उतरा हूँ”   यूहन्ना :३८, इब्रानियों १०:

क्या आपका मसीही जीवन इन तीन सूत्रों पर आधारित है ?

शिष्य थॉमसन