तुम मनुष्यो को दिखाने के लिए अपने धर्म के काम ना करो - मत्ति 6:1 आज यीशु भक्ति या आराधना के नाम पर मनोरंजन दिखाई दे रहा है| गीतों की धुन, संगीत और गायक की आवाज़ को महत्व दिया जा रहा है| सत्संगो में बड़े बड़े नामी गायको को बुलाया जाता है| व्यापार की दुनिया मसीही जगत में आ गयी है| भक्ति बिकाऊ बस्तु बन गई है और मनुष्य अपनी महिमा बटोर रहा है| सच्चे भक्त को इस चक्रव्यूह से निकालना होगा| यूहन्ना 4:23 में लिखा है ""पिता अपने लिए भजन करने वालों को खोजता है|" भक्तों के हृदय देखे जाते है क्या उनमे सत्य है या कहीं वे दिखावटी या नकली उपासना तो नही कर रहे हैं| दिखावटी जीवन फारीसी धर्मगुरुओं का था जो भक्ति तो करते थे पर उनके मन कपट और सारे अधर्म से भरे हुए थे| आत्मा से उपासना का अर्थ है, हमें अपने जीवन के हर एक पहलू से परमेश्वर की महिमा करना है| चाहे हम स्कूल में, नौकरी में, बाजार में, कलीसिया में या अपने घर ही में क्यो ना हों, हमें प्रभु यीशु में अपना नया जीवन दिखाना है| हमारे जीवन से परमेश्वर की महिमा होनी है| भक्ति से पहले जीवन चाहिए| प्रभु यीशु ने कहा है "वेदी में भक्ति लाने से पहले अपना जीवन सुधारो" - मत्ति 5:24 हर घड़ी परमेश्वर की महिमा करो| प्रभु यीशु हमारी संपूर्ण उपासना के योग्य हैं| "यदि हम भक्ति नही करेंगे तो, निर्जीव पत्थर, जीवित हो, जय जयकार करेंगे|" - लूका 19:40 परमेश्वर ने बालकों और दूध पीते बच्चो के मुह से आराधना कराई है, मत्ति 21:16, और इसका परिणाम, भजन 8:2 में लिखा है - "इस भक्ति के द्वारा शत्रुओं और बदला लेने वालों का सामना होता है" क्या आप सच्चे भक्त हैं?
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