लिखा है – अंत के दिनों में कठिन समय आएँगे – २ तीमुथियस ३:१-५
क्योंकि
[ये झूठे भक्त के कई गुण बताए गये हैं]
मनुष्य स्वयं से प्रेम करने वाले, लोभी, डींगमार, अभिमानी, निन्दक, माता-पिता की आज्ञा टालने वाले, कृतघ्न, अपवित्र, क्षमा-रहित, दोष लगाने वाले, असंयमी, कठोर, भले के बैरी, विश्वासघाती, ढीठ और घमण्डी होंगे। और परमेश्वर के नहीं बरन सुखविलास ही के चाहनेवाले होंगे। भक्ति का भेष तो धरेंगे, पर उस की शक्ति को न मानेंगे।
कठिन क्यों हैं?
क्या इसलिए की महँगाई बढ़ जाएगी और अकाल पड़ेगा, या बीमारियाँ फेलेंगी या लड़ाइयाँ होंगी और परमाणु शस्त्रों का इस्तेमाल होगा?
ऐसा नहीं है –
पर कठिन समय इसलिए आएँगे क्योंकि मसीही कहलाने वाले झूठे विश्वासी चर्च मे बैठने लगेंगे। ये बाहर के लोग नहीं हैं पर कलीसिया के अंदर के वे लोग हैं जो बहुरुपिये हैं।
झूठी भक्ति और झूठे भक्त –
- भक्ति का भेष तो धरेंगे, पर उस की शक्ति को न मानेंगे
- भक्ति है पर शक्ति नहीं है
भक्ति की शक्ति – विश्वास की शक्ति है
उनके लिए परमेश्वर किताबों में सर्वशक्तिमान हैं पर उनके जीवन मे वो शक्तिहीन हैं।
प्रभु यीशू ने कहा था –
मकान है पर नींव नहीं है
दो मकान का उदाहरण अपने पहाड़ी उपदेश में प्रभु यीशू से सुना था। दोनो एक जैसे दिखते थे। एक की नींव थी और एक बिना नींव के खड़ा था। अंजाम ये हुआ कि नींव रहित मकान चकनाचूर हो गया।
प्रभु यीशू ने कहा था –
तुम बर्तन को बाहर से मांझते हो पर अंदर से गंदा छोड़ देते हो – ये बर्तन मनुष्य का जीवन है जो बाहर से साफ दिखता है लेकिन अंदर से पाप ओर उसकी अभिलाशाओं से भरा है।
भक्ति का भेष उनके पास होगा लेकिन बस दिखावटी क्योंकि परमेश्वर और उसके वचन की शक्ति पर उनका विश्वास नहीं है।
[सच्चे भक्त के गुण भी बताए गये हैं]
शिक्षाओं को मानना, नये जीवन का चाल चलन, जीवन के उदेश्श्य में परमेश्वर की महिमा, विश्वास, सहनशीलता, प्रेम, धीरज, और सताए जाने, और दुख उठाने को तैयार रहना। – २ तीमुथियस ३:१०-११
सच्चे भक्त और झूठे भक्त मे मूल फ़र्क क्या है –
- एक परमेश्वर को चाहने वाला है [आत्मिक है]
- दूसरा सुख-विलास चाहनेवाला है. [सांसारिक है]
झूठे मसीही के सांसारिक उपदेशक
क्योंकि ऐसा समय आएगा, कि लोग खरा उपदेश न सह सकेंगे पर कानों की खुजली के कारण अपनी अभिलाषाओं के अनुसार अपने लिए बहुतेरे उपदेशक बटोर लेंगे। और अपने कान सत्य से फेरकर कथा-कहानियों पर लगाएंगे। –२ तीमुथियस ४:३-४
आत्मिक मसीही के पवित्र आत्मा परिपूर्ण उपदेशक
कि तू वचन को प्रचार कर; समय और असमय तैयार रह, सब प्रकार की सहनशीलता, और शिक्षा के साथ उलाहना दे, और डांट, और समझा। पर तू सब बातों में सावधान रह, दुख उठा, सुसमाचार प्रचार का काम कर और अपनी सेवा को पूरा कर। – २ तीमुथियस ४:५
तो क्या इस दोहरी ज़िंदगी का कोई इलाज है?
जी हाँ अवश्य है और वो है पवित्र-शास्त्र
पवित्र शास्त्र तुझे मसीह पर विश्वास करने से उद्धार प्राप्त करने के लिए बुद्धिमान बना सकता है।
पवित्रशास्त्र परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है और उपदेश, और समझाने, और सुधारने, और धर्म की शिक्षा के लिए लाभदायक है। ताकि परमेश्वर का जन सिद्ध बने, और हर एक भले काम के लिए तत्पर हो जाए। – २ तीमुथियस ३:१५-१७
कहीं बहुरुपिये तो नहीं हैं ?
शिष्य थॉमसन