“मैं नहीं हूँ” तो ज़ोर से बोलते हैं – पर “मैं हूँ” धीरे से मुँह पर आता है।
तीन साल प्रभु यीशु के साथ घूमते हुए हो गये, नाव छोड़ी थी, मछलियों का व्यापार छोड़ा था, घर-बार छोड़ा था। एक बार तो प्रभु के सामने छोड़ी और खोई हुई चीज़ों की गिनती भी कर दी थी। पर उस रात क्या हो गया था?
ऐसा क्या की एक द्वारपालिन स्त्री का सवाल दिल को दहला दे?
रात के अंधेरे में पतरस के लिए उस समय तक सब ठीक था जब तक उसे कोई ना पहचाने, वो उसके नज़दीक तक आ सकता था और उसके पीछे भी आ सकता था।
उस समय एक छोटा सा सीधा सवाल- “तू भी यीशू गलीली के साथ था”
यीशु के साथ होना एक अपराध था।
एक ऐसा तूफ़ानी सवाल की पतरस की जड़ें उखड़ गयीं।
उसने जल्दी से जवाब दिया – “मैं नही जानता कि तू क्या कह रही है”
यीशू को गलीली कहकर उसे नीचा दिखाना था, ग्रामीण बताना था, पिछड़ा बताना था।
उसके बाद एक दूसरी स्त्री आई और सबूत भी लाई। यह भी तो यीशु नासरी के साथ था – शायद वो पकड़ने आए लोगों की भीड़ में रात को गतसम्ने में शामिल थी
पतरस ने जवाब दिया – “मैं उस मनुष्य को नहीं जानता”
यानी ना मैं कोई खबर से वाकिफ़ हूँ, ना मैं इस मनुष्य से वाकिफ़ हूँ।
तभी कुछ लोग उसे पहचानने लगे – सचमुच तू भी उनमें से एक है – क्योंकि तेरी बोली तेरा भेद खोल देती है।
इन देहाती मछुआरों ओर गलीलिओं की जुबान एक थी, और हमारे प्रभु यीशु की जुबान और शैली भी वही थी। सही कहा है – “मैं कंगालों, कुचले हूओँ, अंधों ओर बंधुओं के पास आया हूँ”
तीसरी बार पतरस क्रोधित हुआ, भला बुरा कहने लगा और बोला – मैं उस मनुष्य को नहीं जानता – मत्ती २६:६९-७३
आज सवाल है – कहीं हम भी उसे जानकार अंजान तो नहीं बन रहे हैं?
या हो सकता है कि सवाल से पहले ही हम अपने चालचलन से ये बताते हैं कि हम उसे नहीं जानते।
मैं यूनानियों और अन्यभाषियों का और बुद्धिमानों और निर्बुद्धियों का कर्जदार हूं। रोमियो १:१४ और यदि मैं सुसमाचार न सुनाऊं, तो मुझ पर हाय। १ कुरिन्थियों ९:१६
परन्तु जब पवित्र आत्मा तुम पर आएगा तब तुम सामर्थ पाओगे; और यरूशलेम और सारे यहूदिया और सामरिया में, और पृथ्वी की छोर तक मेरे गवाह होगे। प्रेरितों के काम १:८