Gunah Aur Mohabbat (Urdu)

गुनाह और मुहब्बत

– आज हमारे पास सवाल हैं?
– क्या मोहब्बत रहम कर सकती है?
– क्या मोहब्बत माफ कर सकती है?
– क्या मोहब्बत टूटा रिश्ता बहाल कर सकती है?
– क्या मोहब्बत दूसरे का क़र्ज़ अदा कर सकती है?
– क्या है ऐसी मोहब्बत जो दुश्मन को माफ करे और उसे बचाने को अपनी जान दे?

हज़रत ईसा ने फरमाया –

मज़हबी रहनुमाओं ने तुमसे कहा था l तुम खून न करना , पर में तुमसे कहता हूँ तुम गुस्सा भी नहीं रखना
तुम्हें सिखाया गया था की आँख के बदले आँख और दांत के बदले दांत , पर में कहता हूँ की बुरे का सामना बुराई से
नहीं करना l बल्कि जो कोई तुम्हारे एक गाल पर थप्पड़ मारे उसकी तरफ दूसरा भी फेर देना l

तुम्हें सिखाया गया था की अपने पड़ोसी से मोहब्बत रखना और अपने दुश्मन से अदावत , लेकिन में तुमसे कहता हूँ की अपने दुश्मनों से मोहब्बत रखो और अपने सतानेवालों के लिए दुआ मांगो l

अगर तुम लोगों के कसूर माफ करोगे तो तुम्हारा खुदा भी तुम्हें माफ करेगा l
मोहब्बत साबिर है और मेहरबान l मोहब्बत सब कुछ सह लेती है , और सब बातों को बर्दाश्त करती है l
ऐ मेहनत उठाने वालो और बोझ से दबे लोगो मेरे पास आओ में तुम्हे आराम दूँगा l
जैसे मैंने तुम से मोहब्बत की है वैसे ही तुम भी एक दूसरे से मोहब्बत रखो l
इससे बड़ी मोहब्बत नहीं की कोई अपने दोस्त के लिए जान दे , पर मैं गुनाहगारों के लिए जान देता हूँ l

मैंने तुम्हारे लिए खून बहाया है l
तुम्हारा दिल न घबराये और न डरे , मूझ पर ईमान रखो l
राह , हक़ और ज़िन्दगी में ही हूँ l
में अपना इत्मीनान तुम्हें देता हूँ l

मैंने मौत पर फतह पाई है l

– मैं कंगालों को खुशखबरी लाया हूँ l
– मैं कैदियों को रिहाई देने आया हूँ l
– मैं अंधों की आँखें खोलने आया हूँ l
– और कुचले हुओं को आज़ाद करने आया हूँ l

मेरे नाम से दुआ मांगो , मैं जवाब दूँगा l

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Gunah and Mohabbat