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Sermon on the mount 

यीशु मसीह का पहाड़ी उपदेश

Yeshu Katha, Gospel of John – Part 14 

Listen 18 hours preaching on John’s gospel by Shishye Thompson in Hindi



Yeeshu Bhakti Aatmik Andolan



    through the Gospel in Hindi   yeshu Bhakti Satsang, pravachan in hindi

ढूँढ़ते थे हम तुझे कब्रों में

मृत्यु बंधन टूटे सारे,
चट्टानें तड़क कर,
आ गए हैं ख्रिस्त वापस,
काल को हरा कर,

क्या है ऐसा प्रेम भी,
जो डर कभी ना पाए,
कब्र में भी जाए गर,
तो फिर भी लौट आये,

ढूँढ़ते थे हम तुझे
कब्रों में जीवन दाता,
तुझको पाया जीवितों में,
हमने मुक्तिदाता

पुनरुत्थान और जीवन मैं ही,
कहने वाले यीशु,
मृत्त्युन्जय हाँ हो तुम्हीं,
जीवित हो तुम ही यीशु,

धरती कापते घन भयंकर,
सूर्य भी छिप जाए नाभपर,
वचन की सामर्थ लाये,
अब विजय मृत्यु पर

नम नमो, नम नमन तुझको,
करते सब ही मिलकर,
जय, जय, जय, और जय हो तेरी,
यीशु ख्रिस्त परमेश्वर

यीशु मेरा युग युग जन्मा

By Bro. Narsimha Rao

एक या दो दिन में ना जन्मा |
यीशु मेरा युग युग जन्मा |

युग युग में वोह हर युग में वोह |
अनंत काल से जीवित है वोह |

चरण कमल हैं पित्तल जैसे |
भट्टी में जो चमकें वैसे |

धवल वस्त्र अंगार के आँखें |
अधिक जल के गर्जन जैसा |

जब ये बोले स्वर है वैसा |
युगपुरुष हैं सेनाधिपती |

सर्व लोक सम्राट वो फिर भी |
दीन, दलित और कंगालों के |

पाप को लेकर अपने ऊपर |
क्रूस मरण कर जीवन देकर |

बन गया वो तारण हारा |
केवल उसमे है उद्धार |

मैं सेवक बन जाऊं…

कमर बाँध, अंगोछा कस कर,
जल ले बैठूं चरण कमल पर,
मुझको भी शक्ति दो प्रभुवर,
मैं सेवक बन जाऊं… (1)

तुमने ही तो सिखलाया था,
खुद करके भी दिखलाया था,
मुझको भी तुम शिष्य बनालो,
मैं सेवक बन जाऊं… (2)

सेवा मैं लेने नहीं आया,
सेवक बनकर हूँ मैं आया,
मुझको भी ये शक्ति दे दो,
मैं सेवक बन जाऊं… (3)

सुबह शाम मैं दुआ करूँगा,
चरणों पर बैठा भी रहूँगा,
मुझको अपना दर्शन दे दो,
मैं सेवक बन जाऊं… (4)

दुश्मन को दुश्मन ना कहूँगा,
मित्र सभी का सदा रहूँगा,
मुझको ऐसा मन तुम दे दो,
मैं सेवक बन जाऊं… (5)

ले जाएँ बेगार में जब वे,
हो जाए जब पावँ थके ये,
मुझको चलने का बल तुम दो,
मैं सेवक बन जाऊं… (6)

जब वे झूठी बात गढ़ें तब,
मिल जुलकर अपमान करें सब,
मुझको दो तुम क्षमा शक्ति तब,
मैं सेवक बन जाऊं… (7)

चाहे सताएं मुझको हरदम,
श्राप सुनाएं क्रोध न हो कम,
मुझको आशीर्वाद वचन दो,
मैं सेवक बन जाऊं… (8)

जो है बड़ा वो बने ही छोटा,
जो हो प्रधान, गुलाम सभी का,
मुझको झुकने की महिमा दो,
मैं सेवक बन जाऊं… (9)

मन को दीन करो मेरे तुम,
नम्र हृदय दो दान प्रभु तुम,
मुझको झुकने की गरिमा दो,
मैं सेवक बन जाऊं… (10)

भूखों को तुम धन्य कहे हो,
प्यासों को जल तुम देते हो,
मुझको भी संतुस्ट बना दो,
मैं सेवक बन जाऊं… (11)

दया दिखाएं दया वो पाएं,
कृपा करें जो, कृपा वो पाएं,
मुझको तुम अनुग्रह ऐसा दो,
मैं सेवक बन जाऊं… (12)

मेल मिलाप का काम मुझे दो,
सबको प्रेम प्रचार करे जो,
मुझको ख्रिस्त स्वरुप बना दो,
मैं सेवक बन जाऊं… (13)

दुःख सहने के इस आनंद को,
दर्द उठाने के संयम को,
मुझको तुम सतगुण ये दे दो,
मैं सेवक बन जाऊं… (14)

नमक कहा था तुमने हमको,
ज्योत, तमस को मिटाती है जो,
मुझको यह जीवन तुम दे दो,
मैं सेवक बन जाऊं… (15)

इतना तुम मुझे ऊंचा कर दो,
वध-स्तम्भ पर मुझको जड़ दो,
मुझको अपनी महिमा दे दो,
मैं सेवक बन जाऊं… (16)

क्रोध को मुझसे दूर करो तुम,
गर्व, घमंड को चूर करो तुम,
मुझको संत बना दो प्रभु तुम,
मैं सेवक बन जाऊं… (17)

आँख से आँख का बदला न लूं,
दांत से दांत को भी ना तोडू,
मुझको बस वो ज़ख्म दिखा दो,
मैं सेवक बन जाऊं… (18)

दोष न में किस पर भी लगाऊं,
मार्ग, सत्य, जीवन को दिखाऊं,
मुझको मेरा कपट दिखा दो,
मैं सेवक बन जाऊं… (19)

तुमने कहा, मांगो, ढूँढो तुम,
पाओगे, खटखटाओ जब तुम,
मुझको तुम यह मन्त्र सिखा दो,
मैं सेवक बन जाऊं… (20)

शक्ति प्रयोग में नहीं करूँगा,
चमत्कार से नहीं जिऊंगा,
मुझको अपनी आत्मा दे दो,
मैं सेवक बन जाऊं… (21)

बंधुओं से में मिला करूँगा,
कंगालों की सुधि रखूँगा,
मुझको कुचले लोग दिखा दो,
मैं सेवक बन जाऊं… (22)

बेघर को घर दे दूँ अपना,
नंगों को पहना दूँ कपडा,
मुझको दान का वर दो दाता,
मैं सेवक बन जाऊं… (23)

सारे जगत में जाकर प्रभु मैं,
गली, गाँव, बस्ती, घर घर में,
मुझको, अपना वचन, प्रभु दो,
मैं सेवक बन जाऊं… (24)

स्वर्ग छोड़कर ताज तजे तुम,
स्वर्ण सिंहासन से उतरे तुम,
मुझको भी सिखला दो प्रभु तुम,
मैं सेवक बन जाऊं… (25)

क्रूस उठाकर फिरा करूँगा,
कर इनकार मैं जिया करूँगा,
मुझको मरने का वर दे दो,
मैं सेवक बन जाऊं… (26)

क्रूस हाँ क्रूस चढ़ाओ – Crucify him

यरूशलेम में भीड़ ये कैसी
सुबह सुबह बगावत जैसी
शोर यहाँ बस यह सुन पाया
क्रूस हाँ क्रूस चढ़ाओ – 1

पुरुष स्त्री बच्चे बूढ़े सब
पैदल सेना घोड़े ये सब
क्या कोई दुश्मन है आया
क्रूस ये किसे चढ़ाओ – 2

गत्समने के बाग में सारे
लाठी तलवारें ले आये
किस को कुछ भी सूझ न पड़ता
अंधियारा अंधियारा – 3

हाँ ये तो है वही यहूदा
शिष्य प्रभु का जिसने बेचा
मित्र कहा फिर भी उसने क्यों
किसे शत्रु ठहराया – 4

किसे ढूँढ़ते हो तुम लोगो
मुझको तो इन्हें जाने दो
नासरत का यीशु में हूँ
में हूँ हाँ में ही हूँ – 5

न तलवार करे कभी रक्षा
जो ले हाथ वही है मरता
मैं आया हूँ प्राण गंवाने
मरके जीवन दान दिलाने – 6

क्या तुम ही हो मसीह बता दो
चमत्कार भी कुछ दिखलादो
तब ही तुम्हे मसीह कहेंगे
क्रूस मरण से मुक्त करेंगे – 7

पीलातुस ने सवाल किये जब
हेरोदेस अपमान किये तब
मुंह न खोला फिर भी प्रभु ने
आया वो था मुक्ति देने – 8

 कोड़े मारे मुंह पर थूके
कांटो का भी ताज पहनाये
कपड़े फाड़े थप्पड़ मारे
क्या ये हाल बनाए – 9

बीच शहर में क्रूस उठाये ,
सब निंदा अपमान उठाये
गिरता था उठता था वह फिर
लहुलुहान वो चलता जाए – 10

हाँ शिखर कलवरी चढ़ना होगा
वहां भी न उसे रुकना होगा ,
और भी उठकर काठ पर चढ़कर
रक्त ध्वज फहराना होगा – 11

कीलें हाथों और पैरों में
कांटे ताज रखे वह सर में
क्या श्रृंगार हुआ ये प्रभुका
मेरा न्याय हुआ या उसका – 12

पिता क्षमा कर दो इन सब को
ये अनजान न जाने तुझको
बस इनकी तुम आँखें खोलो
स्वर्गराज्य में दाखिल करलो -13

पत्थर क्यों ये लुड़क गया है
कब्र का बंधन टूट गया है
पुनुरुत्थान और जीवन में हूँ
कहकर यीशु जीत चुका है – 14

जो मेरे ही पीछे आये
अपना क्रूस उठाकर लाये
कर इनकार चले हर दिन जो
साथ रहे मेरे युग युग वो – 15

आसमान को देख रहे थे
आशीर्वाद में हाथ बढ़े थे
फिर आने का वादा करके
यीशु प्रभुजी स्वर्ग गये थे – 16