प्रेमपूर्ण आग्रह – प्रभु यीशु का

मेरे तोड़े गये शरीर ओर बहाए लहू को याद करना। प्रभु यीशु आख़िरी रात को अपने चेलों के साथ भोजन करने बैठते हैं और उस भोज के दौरान वो एक नया प्रेमपूर्ण आग्रह करते हैं या जिसे हम प्रेम नियम भी कह सकते हैं।

वो रोटी हाथ में लेकर कहते हैं, यह मेरी देह है, जो तुम्हारे लिये है: मेरे स्मरण के लिये यही किया करो।

मेरे तोड़े गये बदन को याद रखना, उन्होंने कटोरा भी लिया, और कहा; यह कटोरा मेरे लहू में नई वाचा है; जब कभी पीओ, तो मेरे स्मरण के लिये यही किया करो।

यह नया अनुबंध (कांट्रॅक्ट) है।

भेड़, बकरियों, बैलों के लहू के समान नहीं जो कोई स्थाई उपाय ना दे सके, सालाना की माफी से क्या फ़ायदा है। यदि हमारा गुनाहों से मन ना फिराना हुआ, यदि हमारे विवेक में कुछ तब्दीली नहीं आई यदि हमारा चरित्र ही नहीं बदला?

प्रभु यीशु की नयी वाचा का लहू हमें स्थाई क्षमा देता है, हमारे मरी आत्मा को जीवित करता है, हमारे विवेक को नया करके प्रभु यीशू का मन स्थापित करता है।

उसका लहू हमारे लिए प्रेम दया, क्षमा और अनुग्रह की बातें करता है। यानि जान देकर वो वादा करता है। यह वो लहू नहीं जो हाबिल का कैन द्वारा बहाया गया था – जो अभी भी जीवित तो है पर मिट्टी से पुकार कर बदले की अपील करता है।

प्रभु यीशु ने कहा – मेरे बहे लहू को स्मरण करते हुए मुझे याद करना। जब कभी तुम यह रोटी खाते, और इस कटोरे में से पीते हो, तो प्रभु की मृत्यु को जब तक वह न आए, प्रचार करते हो।

दुनिया में कोई नहीं जो अपने ज़ख़्मी शरीर, बहते खून या अपनी मौत की याद अपने चाहने वालों के लिए छोड़ता हो। तो फिर प्रभु यीशू ने ऐसा क्यों किया ?

मेरे लिए तुम सोने चाँदी या कीमती स्मारक नहीं बनाना या मेरी मूर्तियाँ स्थापित नहीं करना लेकिन मेरी मौत को याद करना और दुनिया पर प्रगट करना दुनिया की नज़र में ये उसकी हार ही क्यूँ नं नज़र आए लेकिन उसकी मृत्यु ही हमारा वरदान बनी है, हमारा जीवन बनी है।

उसके शरीर में भाग लेने का मतलब है उसका जीवन और हमारा जीवन अब एक सा है। उसकी मौत को याद कर मातम नहीं करना है। वो हमारी सहानुभूति नहीं चाह रहा है। यदि ऐसा होता तो एक कलाकार की बनाई गयी भावुक तस्वीर ही काफ़ी होती।

उसकी मृत्यु का प्रचार करना है – और यदि उसकी मृत्यु का प्रचार करते हैं तो उसमें हमारी अपनी मौत भी छिपी हुई है क्योंकि हम भी उसके साथ क्रूस पर मार गये हैं।

हमारा पुराना मनुष्यत्व उसके साथ क्रूस पर चढ़ाया गया, ताकि पाप का शरीर व्यर्थ हो जाए, ताकि हम आगे को पाप के दासत्व में न रहें। रोमी ६:६

  • इसलिए यदि हम नहीं मरे तो हमारा मसीही जीवन एक धोखा है।
  • यदि हम उसके साथ मर गये तो उसके साथ हमेशा के लिए जियेंगे भी।
  • यदि हम उसके साथ मर गये और प्रभु से प्रेम करते हैं तो हम उसका प्रेम आग्रह हमेशा पूर्ण करेंगे

शिष्य थॉमसन