प्रभु यीशु का शीघ्र द्वितीय आगमन

प्रभु यीशु के जीवन और पुनरुत्थान के गवाह।
धर्म प्रचारक नहीं, यीशु मसीह के शिष्य।

मर-मर के जीवन में आया

मर-मर के जीवन में आया

“मर-मर के जीवन में आया” (असली और नकली क्रूस – कविता) सोचा था, सोने का मैंने हीरे मोती, जड़ा हो जिसमें चाहा वो ही, क्रूस था मैंने जो प्रिय हो सबकी आंखों मैं दूर दूर तक, ढूंढा मैंने देश विदेश, भी घूमा था मैं भूलभुलैय्यों, की गलियों में दुनिया की चौड़ी सड़कों में लोगों नेRead more about मर-मर के जीवन में आया[…]

नहीं सोचा था फिर भी, खामोश रहोगे

नहीं सोचा था फिर भी, खामोश रहोगे

“मुंह बंद रखने का वरदान” मेरा सोचना है। की ये एक बड़ा वरदान है जो पवित्र आत्मा हमें दे सकता है। मुंह बंद रखने के लिए पवित्र आत्मा की सामर्थ चाहिए। प्रभु यीशु के जीवन से संबंधित एक वाक्य ने मुझे बहुत प्रभावित किया है। वो यशायाह नबी की किताब में लिखा है। “उसने अपनाRead more about नहीं सोचा था फिर भी, खामोश रहोगे[…]

तो देखा था मैने उसे रोते…

तो देखा था मैने उसे रोते…

युहन्ना ११ पड़ते हुए कुछ पंक्तियाँ लिखीं- शिष्य बिलखती हुई बहनों को व्याकुल असहाय आँखों को भाई के मरने पर तड़पते पाया तो देखा था मैने उसे रोते पुनरूतथान वा जीवन मे हूँ मृत्यु पर जयवंत मे हूँ कहने पर भी भरोसा न लाए जब तो देखा था मैने उसे रोते होते अगर, न जातेRead more about तो देखा था मैने उसे रोते…[…]

भूल न जाना जन्मोत्सव में

भूल न जाना जन्मोत्सव में

भूल न जाना जन्मोत्सव में, फुलझड़ियों की चमक दमक में, आये थे प्रभु यीशु जग में, हम सबको नवजीवन देने भूल न जाना जन्मोत्सव में, सृष्टी ने कर्ता को नकारा, अन्धकार ने न स्वीकारा, तिरस्कार ही था बस घर में, भूल न जाना जन्मोत्सव में, धर्म, अधर्म के इन योगों में, सर्व लोक के प्रभुRead more about भूल न जाना जन्मोत्सव में[…]

मैं सेवक बन जाऊं…

मैं सेवक बन जाऊं…

कमर बाँध, अंगोछा कस कर, जल ले बैठूं चरण कमल पर, मुझको भी शक्ति दो प्रभुवर, मैं सेवक बन जाऊं… (1) तुमने ही तो सिखलाया था, खुद करके भी दिखलाया था, मुझको भी तुम शिष्य बनालो, मैं सेवक बन जाऊं… (2) सेवा मैं लेने नहीं आया, सेवक बनकर हूँ मैं आया, मुझको भी ये शक्तिRead more about मैं सेवक बन जाऊं…[…]