वो शून्य बन गया।

प्रभु यीशु के जन्मोत्सव पर वचन से कुछ विचार आये

एम्मानुएल एक टाइटल था और यीशु उसका नाम था – उसने आकर हमारे बीच डेरा किया और हमने उसकी ऐसी महिमा देखी जैसे परमेश्वर पिता के एकलौते बेटे की वो जो हमें पाप से छुड़ाएगा।

कुंवारी से जन्म अद्भुत था।

जन्म का समय आया प्रभु यीशु महल में पैदा नहीं हुए कठिन समय में परमेश्वर की इच्छा पूर्ण हुई।

कुंवारी जन्म समाज में अनहोना था नासरत से बेतलहम जाना था परमेश्वर ने फिर भी जन्म का समय या स्थान नहीं बदला कितनी बड़ी चुनौती ही क्यों न थी सराय में जगह नहीं थी और जन्म की घडी आपहुंची कोई भी व्यवस्था नहीं थी। साफ सफाई नहीं थी परमेश्वर को यह सब मालूमथा लेकिन परमेश्वर का वचन नहीं टलना था सैंकड़ो वर्ष पहले मीका नबी ने कहा था जन्म बेतलेहेम के छोटे शहर में होगा धर्मनगरी यरूशलेम में नहीं वह पूरा होगा।

जन्म के समय कई ज्योतिषी पूरब देश से आये उन्हें एक अद्भुत सितारा दिखाई दिया और उन्हें मालूम हो गया की ये महान राजा के जन्म की घोषणा है।

वे चल पड़े करीब दो वर्ष लगे होंगे खराब रास्ता सैंकड़ो मील का दुर्गम मार्ग ऊंटों की धीमी चाल फिर भी परमेश्वर के समय की बारीकी देखिये प्रभु यीशु का जन्म जिस दिन हो उस दिन वो मंज़िल पहुँच सकें चाहे बीच में मार्ग भटक गए थे तारे की ओर से ध्यान हटाकर अपनी बुद्धि का इस्तेमाल कर वे राजा हेरोदेस के परिवार में राजाओं के राजा को खोजने लगे थे गैर यहूदी ज्योतिषियों को परमेश्वर का वचन नहीं मालूम था तब हेरोदेस धर्मशास्त्रियों से पूछता है जन्म कहाँ होगा ? वे बताते हैं बेतलेहेम में जन्म के दिन अन्यजाति ज्योतिषी और यहूदीचरवाहे प्रभु यीशु को सूती कपड़ों के टुकड़ों में लिपटे पाते हैं प्रणाम करते हैं।

सच में जैसे फिलिपिओं २ में लिखा है वह शून्य बन गया ताकि वे जो संसार में शून्य हैं उनसे मिल सके।

प्रभु यीशु तेरे चरणों पर शत-शत प्रणाम।