आख़िर ये कैसी शांति है ?

और प्रभु का एक दूत उन के पास आ खड़ा हुआ; और प्रभु का तेज उन के चारोंओर चमका, तब स्वर्गदूत ने उन से कहा, मत डरो; क्योंकि देखो मैं तुम्हें बड़े आनन्द का सुसमाचार सुनाता हूं जो सब लोगों के लिये होगा कि आज दाऊद के नगर में तुम्हारे लिये एक उद्धारकर्ता जन्मा है, और यही मसीह प्रभु है।
तब एकाएक उस स्वर्गदूत के साथ स्वर्गदूतोंका दल परमेश्वर की स्तुति करते हुए और यह कहते दिखाई दिया कि आकाश में परमेश्वर की महिमा और पृथ्वी पर उन मनुष्योंमें जिनसे वह प्रसन्न है शान्ति हो।

लूका २:१०-१४

चरवाहे मैदान में रात को भेड़ों के साथ थे। अचानक एक फरिश्ता आकर उन्हें खुशख़बरी देता है। इस बड़े आनंद के समाचार ने उनकी रोजमर्रा की ज़िंदगी नहीं बदली. उन्हें मकान , पैसा, या नौकरियाँ नहीं मिली तो फिर कैसी है ये खुशख़बरी?

आज मसीही जगत मै लोग यीशू की खुशख़बरी को ऐश ओ आराम के साधन पाने से जोड़ते हैं

फरिश्ते मिलकर गीत गाते हैं – कि आकाश में परमेश्वर की महिमा और पृथ्वी पर उन मनुष्योंमें जिनसे वह प्रसन्न है शान्ति हो।

आकाश में परमेश्वर की महिमा हो –इसका मतलब है धरती पर रहने वाले लोग आकाश में रहने वाले परमेश्वर के प्रेम के लिए मुक्ति उपाय के लिए उसकी महिमा [धन्यवाद और सारा आदर] करें।

शांति तो संसार में ना ही है और ना थी और ना रहेगी पर शांति मनुष्य के जीवन के अंदर मिलेगी उनके जो इस संसार से निकाले जाकर अब परमेश्वर के राज्य में आ गये हैं।

क्योंकि प्रभु ने स्वयं कहा था की जो शांति मै देता हूँ वैसी नही है जो संसार देता है शांति के राजकुमार जब आए तो शांति तो नहीं दिखी उल्टे निर्दोष बच्चों का कत्लेआम हुआ ओर रोना हाहाकार मचा।

एक दूसरे समय प्रभु कहते हैं ये ना सोचो की मैं शांति लेकर आया हूँ। मैं पृथ्वी पर मिलाप कराने को नहीं, पर तलवार चलवाने आया हूं। मत्ती १०:३४ मैं पृथ्वी पर आग लगाने आया हूं लूका १२:४९

वो तलवार जो हमारे शरीर पर चलेगी चाहे संसार द्वारा यीशू के कारण और वो आग जो हमारे शरीर को भस्म कर हमें आत्मिक बनाएगी।

तो फिर शांति कैसी-

“उन मनुष्यों में जिनसे वह प्रसन्न है शान्ति हो।”

तो फिर सच्ची शांति है क्या – इस शांति की परिभाषा क्या है?

– प्रभु यीशू की ये वो शांति है जो उन लोगों को मिलती है जो सारे दुखदर्द सताव घटी कमी निंदा नफ़रत और हिंसा के समय भी परमेश्वर की शरण पर पूर्ण भरोसा रखते हैं ओर उसकी इच्छा पूरी करते हैं जिस तरह पिता की इच्छा पर चलकर प्रभु यीशू ने पिता को प्रसन्न किया।

जिसके जीवन मे रोमियों 8:28 लागू होता है उसके पास शांति है।

शिष्य थॉमसन