क्रूस की कथा नाश होने वालों के लिए मूर्खता है

मैं वचन पड़ रहा था

क्रूस की कथा नाश होने वालों के लिए मूर्खता है . पर हम उद्धार पाने वालों के लिए परमेश्वर की सामर्थ [शक्ति ] है
१ कोरिंथिओं १:१८

क्रूस की कथा क्या है
मानव रूप धारण कर संसार में पापिओं का नाश नहीं पर मुक्ति देने आये प्रभु यीशु के बलिदान और मृतविजय की कथा है

नाश होनेवालों के लिए ये मूर्खता क्यों है

* उन्हें ये कहानी लगती है
* पाप को गंभीरता से नहीं लेते हैं
* परमेश्वर प्रेम कैसे कर सकता है ये समझ में नहीं आता
* पाप का दंड अनंत नरक की अग्नि है ये समझ में नहीं आता
* क्रूस की मृत्यु को वो मोक्ष बलिदान नहीं पर कमज़ोरी समझते हैं
* मृत्यु से जीवित उठने की सच्चाई उन्हें झूठ लगती है
* वे पाप के आनंद उठाना चाहते हैं
* परमेश्वर हमारे पाप की सज़ा खुद क्यों उठायें ये समझ में नहीं आता
* वे अच्छे कर्म से मुक्ति पाना चाहते हैं और नहीं जानते कि पाप सिर्फ कर्म में ही नहीं
पर मन के विचारों और उद्देश्यों में भी होता है

मुक्ति पानेवालों के लिए क्रूस की कथा परमेश्वर की सामर्थ [शक्ति] क्यों है

* इसलिए की उनके जीवन में ईश्वर के सबूत आये हैं
* वे जानते हैं कि पाप क्षमा के लिए वे कुछ भी नहीं अदा कर सकते हैं
* जिसने बनाया है वही बचा सकता है
* ये वरदान है मुफ्त है
* प्रभु यीशु की मृत्यु पर जय उनके लिए आशा का कारण है
* वे भी मृत्यु के बाद स्वर्गलोक में जीवित रहेंगे
* नया जीवन जो पवित्र आत्मा के द्वारा मिलता है नया सबूत लाता है
नया स्वभाव आता है , नया जीवन है
क्षमा , प्रेम , धीरज , कृपा , निस्वार्थ सेवा , सहनशीलता , शांति , आनंद ,
और नम्रता का नया जीवन परमेश्वर की सामर्थ का सबूत लाता है

आप का क्या विचार है ?

क्रूस कि कथा मूर्खता है या सामर्थ?